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Showing posts from May, 2020

Principles of child Development(बाल विकास के सिद्धांत)

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CTET & other state TET Exam Study Notes - बाल विकास के सिद्धांत बाल विकास के सिद्धांत मानव का विकास, उनमें होने वाले मानसिक और शारीरिक परिवर्तनों की एक श्रृंखला है जो भ्रूणावस्था से प्रारंभ होकर वृद्धावस्था तक चलता है. यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है तथा जन्म से लेकर मृत्यु तक चलती रहती है. विकास एक निश्चित दिशा में होता है यह विकास सामान्य से विशिष्ट की और होता है. ये विकास व्यक्ति में नवीन योग्यताएं एवं विशिष्टताएं लाती है. ये सारे विकास एक निश्चित नियम के अनुपालन में होता है. इन्हें ही बाल विकास का सिद्धांत कहा गया है. बाल विकास के कुछ बाल विकास के कुछ सिद्धांत निम्नलिखित हैं: 1.विकास का एक निश्चित प्रतिरूप होता है: मनुष्य के विकास का एक क्रम में होता है और विकास की गति का प्रतिमान भी समान रहता है. सम्पूर्ण विश्व में सभी सामान्य बालकों का गर्भावस्था या जन्म के बाद विकास का क्रम सिर से पैर की ओर होता है. गेसेल और हरलॉक ने इस सिद्धांत की पुष्टि की है. 2.विकास सामान्य से विशिष्ट की ओर होता है: विकास क्रम का व्यवहार सामान्य से विशिष्ट की ओर होता है अर्थात् मनुष्य के विकास के सभी क...

NCF-2005 NOTES IN HINDI

NCF-2005 NOTES I N HINDI NCF = National curriculum framework  “राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रूपरेखा”  NCF-2005 के अध्यक्ष –  प्रोफेसर यशपाल  NCF क्या है ?   NCF या नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क “शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख दस्तावेज” है जो एक ऐसा फ्रेमवर्क प्रस्तुत करना चाहता है जिसके भीतर स्कूल और शिक्षक उन अनुभवों का चयन और योजना बना सकें जो उन्हें लगता है कि सभी बच्चों के पास होना चाहिए। इससे पहले भारत में नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने 2000, 1988 और 1975 में तीन नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क प्रकाशित किए थे। नवीनतम NCF 2005 में प्रकाशित किया गया था। दस्तावेज़ पाठ्यपुस्तकों, सिलेबियों, साथ ही शिक्षण प्रथाओं को बनाने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।  उद्देश्य  1.   बच्चों का सर्वांगीण विकास करना एवं उन्हें स्कूली शिक्षा से बाहरी शिक्षा से जोड़ना।   2.  NCF-2005  बालक के मूल्यांकन के लिए सतत एवं व्यापक मूल्यांकन पर बल देती है। “नवीन सोच, तर्क क्षमता, चिंतन आदि विकसित करना।”  सिद्धांत:  NCF-2005 के पांच सिद...

गुरु ही ब्रह्मा, गुरु ही विष्णु, गुरु ही शंकर

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुरेव परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।   अर्थात, गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूँ। आप सभी गुरुजनों को मेरा प्रणाम